*जिसके मन का भाव सच्चा*
*होता है...*
*उसका हर काम अच्छा*
*होता है...
स्वरचित कविताओं/विचारो/लेखों/ज्ञानवर्धक संग्रह/कहानियां **न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।* *कामये दुःखतप्तानां प्रणिनां आर्तिनाशनम् ॥*
Saturday, September 15, 2018
कहानी एक राजा और मूर्ख बंदर
एक समय की बात है, एक राजा ने एक पालतू बन्दर को अपने सेवक के रूप में रखा हुआ था। जहाँ – जहाँ राजा जाता, वह बन्दर भी उसके साथ जाता। राजा के दरबार में उस बन्दर को राजा का पालतू होने के कारण कोई रोक – टोक नहीं थी। एक गर्मी के मौसम के दिन राजा अपने शयन पर विश्राम कर रहा था। वह बन्दर भी शयन के पास बैठ कर राजा को एक पंखे से हवा कर रहा था। तभी एक मक्खी आई और राजा की छाती पर आकर
बैठ गयी। जब बन्दर ने उस मक्खी को बैठा देखा तो उसने उसे उड़ाने का प्रयास किया। हर बार वो मक्खी उड़ती और थोड़ी देर बाद फिर राजा की छाती पर आ कर बैठ जाती। यह देख कर बन्दर गुस्से से लाल हो गया। गुस्से में उसने मक्खी को मारने की ठानी। फिर वो बन्दर मक्खी को मारने के लिए हथियार ढूडने लगा। कुछ दूर ही उसे राजा की तलवार दिखाई दी। उसने वो तलवार उठाई और गुस्से में मक्खी को मारने के लिए पूरे बल से तलवार राजा की छाती पर मार दी। इससे पहले की तलवार मक्खी को लगती, मक्खी वहाँ से उड़ गयी। बन्दर के बल से किये गए वार से मक्खी तो नहीं मरी मगर उससे राजा की मृत्यु अवश्य हो गयी।
इसलिए कहते है कि मूर्ख को अपना सेवक बनाने में कोई भलाई नहीं!
शब्दावली – Vocabulary :1. समय – samay – time
2. बात – baat – thing, matter
3. राजा – raja – King
4. पालतू – paaltu – Pet
5. बन्दर – bandar – Monkey
6. सेवक – sevak – Servant
7. रूप – roop – in form of
8. जहाँ – जहाँ (pair words) – jahan – jahan – wherever
9. दरबार – darbaar – king’s court
10. कारण – karan – reason, ground
11 .रोक – टोक – rauk – tauk – hindrance
12. गर्मी – garmi – heat, summer
13. मौसम – mausam – season
14. दिन – din – day
15. शयन – shyan – bed
16. विश्राम – vishram – rest
17. पंखा – pankhan – fan
18. हवा – hawaa – air
19. मक्खी – makkhi – fly
20. छाती – chaati – chest
21. गुस्से से लाल होना (adverb) – gusse se lal hona – to become very angry
22. मारना – maarna – to kill
23. ठानना – thanna – to decide
24. हथियार – hathiyaar – weapon
25. दूर – dur – far
26. तलवार – talvaar – sword
27. बल – bal- might, force
28. मृत्यु – marityu – death
29. अवश्य – avashya – sure
30. मूर्ख – murkh – fool, stupid, idiot etc
31. भलाई – bhalaayi – goodness, well being
पंच तंत्र की शानदार कहानी
पंचतंत्र की कहानी: आलसी ब्राह्मण (Panchtantra Ki Kahani: The Lazy Brahmin)
बहुत समय की बात है. एक गांव में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था. उसकी ज़िंदगी में बेहद ख़ुशहाल थी. उसके पास भगवान का दिया सब कुछ था. सुंदर-सुशील पत्नी, होशियार बच्चे, खेत-ज़मीन-पैसे थे. उसकी ज़मीन भी बेहद उपजाऊ थी, जिसमें वो जो चाहे फसल उगा सकता था. लेकिन एक समस्या थी कि वो ख़ुद बहुत ही ज़्यादा आलसी था. कभी काम नहीं करता था. उसकी पत्नी उसे समझा-समझा कर थक गई थी कि अपना काम ख़ुद करो, खेत पर जाकर देखो, लेकिन वो कभी काम नहीं करता था. वो कहता, “मैं कभी काम नहीं करूंगा.” उसकी पत्नी उसके अलास्य से बेहद परेशान रहती थी, लेकिन वो चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती थी. एक दिन एक साधु ब्राह्मण के घर आया और ब्राह्मण ने उसका ख़ूब आदर-सत्कार किया. ख़ुश होकर सम्मानपूर्वक उसकी सेवा की. साधु ब्राह्मण की सेवा से बेहद प्रसन्न हुआ और ख़ुश होकर साधु ने कहा कि “मैं तुम्हारे सम्मान व आदर से बेहद ख़ुश हूं, तुम कोई वरदान मांगो.” ब्राह्मण को तो मुंहमांगी मुराद मिल गई. उसने कहा, “बाबा, कोई ऐसा वरदान दो कि मुझे ख़ुद कभी कोई काम न करना पड़े. आप मुझे कोई ऐसा आदमी दे दो, जो मेरे सारे काम कर दिया करे.”

बाबा ने कहा, “ठीक है, ऐसा ही होगा, लेकिन ध्यान रहे, तुम्हारे पास इतना काम होना चाहिए कि तुम उसे हमेशा व्यस्त रख सको.” यह कहकर बाबा चले गए और एक बड़ा-सा राक्षसनुमा जिन्न प्रकट हुआ. वो कहने लगा, “मालिक, मुझे कोई काम दो, मुझे काम चाहिए.”
ब्राह्मण उसे देखकर पहले तो थोड़ा डर गया और सोचने लगा, तभी जिन्न बोला, “जल्दी काम दो वरना मैं तुम्हें खा जाऊंगा.”
ब्राह्मण ने कहा, “जाओ और जाकर खेत में पानी डालो.” यह सुनकर जिन्न तुरंत गायब हो गया और ब्राह्मण ने राहत की सांस ली और अपनी पत्नी से पानी मांगकर पीने लगा. लेकिन जिन्न कुछ ही देर में वापस आ गया और बोला, “सारा काम हो गया, अब और काम दो.”
ब्राह्मण घबरा गया और बोला कि अब तुम आराम करो, बाकी काम कल करना. जिन्न बोला, “नहीं, मुझे काम चाहिए, वरना मैं तुम्हें खा जाऊंगा.”
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ब्राह्मण सोचने लगा और बोला,“तो जाकर खेत जोत लो, इसमें तुम्हें पूरी रात लग जाएगी.” जिन्न गायब हो गया. आलसी ब्राह्मण सोचने लगा कि मैं तो बड़ा चतुर हूं. वो अब खाना खाने बैठ गया. वो अपनी पत्नी से बोला, “अब मुझे कोई काम नहीं करना पड़ेगा, अब तो ज़िंदगीभर का आराम हो गया.” ब्राह्मण की पत्नी सोचने लगी कि कितना ग़लत सोच रहे हैं उसके पति. इसी बीच वो जिन्न वापस आ गया और बोला, “काम दो, मेरा काम हो गया. जल्दी दो, वरना मैं तुम्हें खा जाऊंगा.”
ब्राह्मण सोचने लगा कि अब तो उसके पास कोई काम नहीं बचा. अब क्या होगा? इसी बीच ब्राह्मण की पत्नी बोली, “सुनिए, मैं इसे कोई काम दे सकती हूं क्या?”
ब्राह्मण ने कहा, “दे तो सकती हो, लेकिन तुम क्या काम दोगी?”
ब्राह्मण की पत्नी ने कहा, “आप चिंता मत करो. वो मैं देख लूंगी.”
वो जिन्न से मुखातिब होकर बोली, “तुम बाहर जाकर हमारे कुत्ते मोती की पूंछ सीधी कर दो. ध्यान रहे, पूंछ पूरी तरह से सीधी हो जानी चाहिए.”
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जिन्न चला गया. उसके जाते ही ब्राह्मण की पत्नी ने कहा, “देखा आपने कि आलस कितना ख़तरनाक हो सकता है. पहले आपको काम करना पसंद नहीं था और अब आपको अपनी जान बचाने के लिए सोचना पड़ रहा कि उसे क्या काम दें.”
ब्राह्मण को अपनी ग़लती का एहसास हुआ और वो बोला, “तुम सही कह रही हो, अब मैं कभी आलस नहीं करूंगा, लेकिन अब मुझे डर इस बात का है कि इसे आगे क्या काम देंगे, यह मोती की पूंछ सीधी करके आता ही होगा. मुझे बहुत डर लग रहा है. हमारी जान पर बन आई अब तो. यह हमें मार डालेगा.”
ब्राह्मण की पत्नी हंसने लगी और बोली, “डरने की बात नहीं, चिंता मत करो, वो कभी भी मोती की पूंछ सीधी नहीं कर पाएगा.”
वहां जिन्न लाख कोशिशों के बाद भी मोती की पूंछ सीधी नहीं कर पाया. पूंछ छोड़ने के बाद फिर टेढ़ी हो जाती थी. रातभर वो यही करता रहा.
ब्राह्मण की पत्नी ने कहा, “अब आप मुझसे वादा करो कि कभी आलस नहीं करोगे और अपना काम ख़ुद करोगे.”
ब्राह्मण ने पत्नी से वादा किया और दोनों चैन से सो गए.
अगली सुबह ब्राह्मण खेत जाने के लिए घर से निकला, तो देखा जिन्न मोती की पूंछ ही सीधी कर रहा था. उसने जिन्न को छेड़ते हुए पूछा, “क्या हुआ, अब तक काम पूरा नहीं हुआ क्या? जल्दी करो, मेरे पास तुम्हारे लिए और भी काम हैं.”
जिन्न बोला, “मालिक मैं जल्द ही यह काम पूरा कर लूंगा.”
ब्राह्मण उसकी बात सुनकर हंसते-हंसते खेत पर काम करने चला गया और उसके बाद उसने आलस हमेशा के लिए त्याग दिया.
सीख: आलस्य ही मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है. अपनी मदद आप करने से ही कामयाबी मिलती है और आलस करने से ज़िंदगी में बड़ी मुसीबतें आ सकती हैं.
Friday, September 14, 2018
उपयोगी प्रति शब्द 2 rs कमाए पूरी तरह समझे फिर आगे आपको मेरे द्वारा लिंक दी जाएगी
.मशीनी अनुवाद का परिचय :- Introduction of Machine Translation
1.मशीनी अनुवाद का परिचय :- Introduction of Machine Translation
अनुवाद के कई प्रकार हैं जिनमें “मशीनी अनुवाद” भी अनुवाद का एक प्रकार है मशीनी अनुवाद में मानव का केवल सहायक के रुप में उपयोग किया जाता है और बाकी काम कंप्यूटर के माध्यम से पूर्ण किया जाता है। जिसे एक विशिष्ट कंप्यूटर प्रोग्राम के द्वारा संचालित किया जाता है। लेकिन अनुवाद केवल शब्दों का खेल नहीं है, अनुवाद के स्त्रोत पाठ में संस्कृति, भाव और संवेदनाओं का भी प्रभाव होता हैं। दो भाषाओं के शब्दों के उलटफेर में कंप्यूटर मानव बुद्धि से आगे निकल गया लेकिन जब बात संस्कृति, संवेदना और भावनाओं के भाषांतरण की आई तो कंप्यूटर पुन: मानव की शरण में आ गया। इस जटिलता को दूर करने में कंप्यूटर इस कदर फँसा हुआ है कि अब बिना मानव सहायता के कंप्यूटर से अनुवाद कर पाना मुश्किल हो रहा है। पूर्णत: सफल म.अनु. का निर्माण न होना ही इसका सबसे बड़ा उदाहरण है इस कार्य में मशीनी अनुवाद निर्माणकर्त्ताओं ने अभी हार नहीं मानी है। भारतीय अनुवाद यंत्र भी इन समस्याओं के बराबर शिकार होते हुए नजर आ रहे हैं। इसीलिए अनुवाद यंत्र निर्माण करने से पूर्व अनुवाद की समस्याओं के विषय में जान लेना आवश्यक हो जाता है। मशीनी अनुवाद की संकल्पना को व्यवस्थित रुप से देखने के लिए म.अनु. की परिभाषाओं को निम्न रुप से देख सकते हैं।
प्रो.सूरजभान सिंह के अनुसार मशीनी अनुवाद की सामान्य परिभाषा यह है कि “अनुवाद की ऐसी प्रक्रिया जिसमें कंप्यूटर प्रणाली(system) के जरिए एक भाषा से दूसरी भाषा में अपने आप अनुवाद हो, इस प्रक्रिया में अनुवाद की जाने वाली सामग्री(Text) को (Input)आगत शब्द के रुप में देते है। कंप्यूटर की भीतरी प्रणाली जिसमें दोनों भाषाओं के शब्दों, मुहावरो और व्याकरणिक नियमों का ज्ञान संचित रहता है, अपने आप उस सामग्री का दूसरी भाषा में अनुवाद करती है और कुछ ही क्षणों में निर्गत पाठ (output) के रुप में अनुदित सामग्री प्राप्त हो जाती है।”1
डॉ. दीपा गुप्ता के अनुसार म.अनु. की परिभाषा कुछ इस प्रकार है। मशीनी अनुवाद एक ऐसी प्रक्रिया है जो पाठ के इकाईयों को एक भाषा(स्रोत भाषा) से दूसरी भाषा(लक्ष भाषा) में कंप्यूटर के माध्यम से अनूदित करती है।“Machine Translation (MT) is the process of translating text units of one language (source language) into a second language (target language) by using computers.”2
उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट होता है कि अंशत: मानव सहायता के साथ (यंत्र) कंप्यूटर का उपयोग कर एक प्राकृतिक मानव भाषा का दूसरी प्राकृतिक मानव भाषा में अनुवाद करना ही मशीनी अनुवाद या यंत्रानुवाद है। इसी के आधार पर म.अनु. में मशीन की सहभागिता के आधार पर म.अनु. को तीन भागों में विभाजित किया गया हैं।
1) पूर्णत: मशीनी अनुवाद (Fully Machine Translation)
2) मानव साधित मशीनी अनुवाद (Human Aided Machine Translation)
3) मशीन साधित मानव अनुवाद (Machine Aided Human Translation)3
1.1 मशीनी अनुवाद की प्रक्रिया और संक्षिप्त इतिहास : -
विश्वभर के मशीनी अनुवाद के इतिहास पर विचार किया जाए तो मशीनी अनुवाद का इतिहास लगभग पचास वर्ष पुराना है। सबसे पहले “मशीनी अनुवाद यंत्र” निर्माण करने का प्रयास १९५६ में जार्ज टाऊन विश्वविद्यालय वाशिंगटन में शुरु हुआ था। जिस पर अल्पेक रिपोर्ट (ALPAC Report1966) के आने के बाद कुछ वर्ष म.अनु. पर हो रहा कार्य काफी धीमा हो गया था। १९८० के दशक के बाद पुन: म.अनु. का कार्य काफी तेज गति से आगे बढ़ा और आज यह स्थिति है कि विश्व में कई मशीनी अनुवाद यंत्र स्वस्थ रुप से अनुवाद कार्य कर रहें हैं। इस बीच कई अनुवाद यंत्र ऐसे भी रहे जो केवल अनुवाद यंत्र निर्माण के अभ्यास के तौर पर निर्माण किए गए थे। इनमें से कुछ म.अनु. यंत्र आज भी काम कर रहें हैं। मशीनी अनुवाद यंत्रों के कुछ नाम इस प्रकार हैं। “GAT, SYSTRAN, LOGOS, METEL, TAUM-METEO, EUROTRA, ATLAS-I, ALTAS-II, TAURUS, PIUOT, ALPA, LOGOS, CULT, TITUS, ARINC-78, METAL, MU, MT.S-NCST आदि।”4
भारत में मशीनी अनुवाद की प्रथम शुरुआत 1983 से मानी जाती है। जो दक्षिण भारत के तमिल विश्वविद्यालय में रशियन-तमिल TUMTS अनुवाद यंत्र के लिए शुरु हुआ। (In India research on MT began in 1983 at the Tamil University in South India. The TUMTS system is a small-scale 'direct translation' system specifically designed for Russian as SL and Tamil as TL and running on a small microcomputer.5) लेकिन इस यंत्र की क्षमता काफी कम थी। इस यंत्र का निर्गत पाठ(Output) भी अधिक उच्च स्तर का नहीं था। इसलिए भारत में मशीनी अनुवाद की विधिवत शुरुआत आई.आई.टी कानपुर में शुरु हुए “अक्षर भारती ग्रुप” के “आंग्लभारती मशीनी अनुवाद यंत्र” से मानी जाती है। इसके उपरांत आज भारत में कई मशीनी अनुवाद यंत्रों पर कार्य किया जा रहा हैं। जिसमें (मॅट)MAT, (अनुवादक)ANUVADAK, (मंत्रा)MANTRA, (शिव)SIVA, (मंत्र)MANTR, (अनुवाद-यन्त्र)ANUVADAYAN- TR (CIILM) (अंग्रेजी-हिंदी) (अनुसारका)ANUSARAKA (भारतीय भाषाओं के लिए), (शक्ति) Shakti (अंग्रेजी-मराठी, हिंदी, तेलगु के लिए) है। भारत सरकार ने भारतीय भाषाओं से भारतीय भाषाओं के लिए मशीनी अनुवाद यंत्र की एक नई महत्वपूर्ण योजना आरंभ की है। जिसमें “Indian Language to Indian Language Machine Translation system” निर्मित किए जा रहें हैं। जिसका विवरण टेबल १ में दिया गया है।
अनुवाद की प्रक्रिया अपने-आप में एक अति कठिन कार्य है। मशीनी अनुवाद की प्रक्रिया पर विचार किया जाए तो म.अनु. की प्रक्रिया मानव द्वारा किए गए अनुवाद(Human Translation) की प्रक्रिया के समान ही है। लेकिन म.अनु. की प्रक्रिया में मानव को केवल एक सहायक के रुप में ही कार्य करना पड़ता है। अनुवाद की प्रक्रिया में उसका कोई कार्य नहीं होता।
सीलिए म.अनु. की प्रक्रिया अधिक जटिल बन जाती है। जिसमें अनुवाद के शब्द चयन से लेकर वाक्य व्याकरणिक संरचना और अर्थ चयन का भी काम मशीन को ही करना पड़ता हैं। मशीन भावनाशून्य और सभ्यता-संस्कृति से अनभिज्ञ होने के कारण “मशीन अनुवाद” प्रक्रिया को सही रुप से अंजाम नहीं दे पाती है। इस प्रक्रिया में पाठ(Text) कई भाषा संसाधनों(LTs) से होकर जाता है। मशीनी अनुवाद की संपूर्ण प्रक्रिया संक्षिप्त रुप में निम्न से देख सकते है।
मशीनी अनुवाद की प्रक्रिया : - मशीनी अनुवाद के लिए सबसे प्रमुख कंप्यूटर में “अभिष्ट भाषिक संरचना का यह व्युत्पादन कंप्यूटर में केंद्रीय संसाधक इकाई के माध्यम से होता है। कंप्यूटर की इस केंद्रीय संसाधक इकाई में एक नियंत्रक इकाई, एक मुख्य स्मृति पटल और एक गणितीय इकाई होती है। जिसके आदेशों के आधार पर कंप्यूटर चलता है। मशीनी अनुवाद की प्रक्रिया भी इसी के आधार पर आगे बढ़ती है। सबसे पहले पाठ निवेशन का कार्य होता है। प्रत्येक मशीनी अनुवाद यंत्र की यह प्रक्रिया दो रुपों में होती है। १.लक्ष्य पाठ अनुवाद यंत्र में दिए गए बॉक्स में टाईप कर दिया जाता है। २.या लक्ष्य पाठ की फाईल को ब्राऊस करके। इस प्रक्रिया के उपरांत ही अनुवाद की प्रक्रिया आरंभ होती है।
सामान्यत: भारतीय मशीनी अनुवाद में अनुसारका मशीनी अनुवाद की प्रक्रिया निम्ना नुसार होती है। प्रथम 1.स्रोत भाषा पाठ(SOURCE LANGUAGE TEXT) 2.धातु(ROOT WORD) मशीन को दिए गए स्रोत पाठ के शब्दों में धातुओं को देखा जाता है। जिससे उचित अर्थ मिल सके। इसके उपरांत दिए गए पाठ में व्याकरणिक कार्य होता है जो सभी अनुवाद यंत्रों में समान नहीं मिलते। व्याकरणिक कार्य अधिकतर अनुवाद यंत्र निर्माण कर्ता ही निश्चित करते है कि मशीनी अनुवाद यंत्र किस व्याकरण के आधार पर कार्य करेगी। जैसे:- 3. वृक्ष संवादिता व्याकरण(POS TAG) इसके आधार से शब्दों को चिन्हित किया जाता है और आगे कार्य भी चलता है। 4.शब्द चिन्हक CHANKAR MARKING 5.पदसूत्र (PADSUTRA) इस प्रक्रिया में शब्दों को फिर से संघटित किया जाता है। 6.शब्द साधक प्रक्रिया (WORD GRUPING) 7.कथ्य विसंदिग्धिकरण (SENSE DISAMBIGUATION) विसंदिग्धिकरण की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। जिससे पाठ में निर्माण होने वाली संदिग्धता दूर की जाती है। पाठ में कई जगह पूर्वसर्ग एवं परसर्ग लगने से कई समस्याएँ निर्माण होती है जिसका निराकरण इस प्रक्रिया के माध्यम से दूर किया जाता है। 8.पूर्वसर्ग गतिविधियाँ(PREPOSITION MOVEMENTS) इस प्रक्रिया में स्रोत पाठ का लक्ष्य पाठ में रुपांतरन करने के लिए शब्दकोश से लिए गए शब्दों का प्रजनन किया जाता है। 9.लक्ष्य भाषा पाठ प्रजनन (TARGET LANGUAGE GENERATION) कई जगह लक्ष्य भाषा पाठ के प्रजनन में कई समस्याएँ निर्माण होती है। शब्द कोश में शब्द का अर्थ या वाक्य पद नहीं मिल पाते हैं ऐसे समय में भाषा व्यवहार संग्रह की मदद ली जाती है। 10.भाषा व्यवहार संग्रह(CORPARA ) यह एक भाषिक साधन है जिसका कार्य पाठ में आए रुपों को विश्लेषित करना एवं रुप संरचना का विश्लेषण करना है । 11.रूपवैज्ञानिक विश्लेषण MORPHOLOGICAL ANYLISAR 12.विश्लेषक(PARASAR) दिए गए पाठ का निर्माण एवं पाठ को प्रदर्शित करने के लिए तैयार करने का काम करता है। जिसे हम आगत पाठ भी कहते है। 13.सर्जक(GENARATER) आगत पाठ मशीनी अनुवाद का सबसे अंतिम चरण होता है। जिसमें सभी व्याकरणिक, कोशिय, अल्गोरिथमिक एवं भाषिक संसाधनों की प्रक्रिया के अंत में जो पाठ निकल कर आता है उसे हम आगत पाठ कहते है। 14.निर्गत पाठ (Output) इस प्रकार मशीनी अनुवाद की सामान्य प्रक्रिया चलती रहती है। इन साधनों के अतिरिक्त अन्य कई साधन भी इस प्रक्रिया में छोटे स्तरों पर कार्य करते हैं। लेकिय यह कार्य भी महत्वपूर्ण होता है।
Graph No.16
(ref. by International Machine Translation )
म.अनु. के सभी साधनों (Tools) का शब्द संचयन(Lexical Data) से अति निकटतम संबंध होता है। जिसके माध्यम से किसी पाठ को स्रोत भाषा से लक्ष्य भाषा तक पहुँचाने में सहायता प्राप्त की जाती है। इस प्रक्रिया में होने वाली एक गलती संपूर्ण पाठ के अंतर्गत समस्या निर्माण करती है। ऐसी समस्याओं को मशीन स्वयं संशोधित नहीं कर पाती है। भारत में भी कई म.अनु. यंत्र बनाये जा रहें हैं जैसे- सी-डॅक नोएडा द्वारा “आँग्ल भारती-मॅट”, आई.आई.टी.हैदराबाद “अनुसारका”, सी-डॉक पुणे द्वारा “मंत्र”, आई.आई.टी.मुम्बई द्वारा “मात्रा”, इन्फ़ोसेट द्वारा “अनुवादक” आदि, परंतु इनमें से किसी में भी अनुवाद की शुद्धता की दर शत-प्रतिशत नहीं हैं, यह भी इसकी एक प्रमुख समस्या है।
कविता ok
कब निकली उम्र मेरी, पता ही नहीं चला,
कंधे तक आ गए, पता ही नहीं चला,
बंगले तक आया, पता ही नहीं चला,
बड़ी गाड़ियों में लगे फिरने कब, पता ही नहीं चला,
कब हुए कंक्रीट के, पता ही नहीं चला,
कब बच्चों के लिए हुए जिम्मेदार, पता ही नहीं चला,
कब रातों की उड़ गयी नींद, पता ही नहीं चला,
कब बच्चो के बच्चे हो गए, पता ही नहीं चला,
रंगना शुरू कर दिया कब, पता ही नहीं चला,
कब छीन ली मोहब्बत आज के दौर ने, पता ही नहीं चला,
कब बच्चे हमसे हुए दूर, *पता ही नहीं चला,*by
कब परिवार हम दो पर सिमटा, पता ही नहीं चला।।।।।
चित्र
कविता 34 ज़िन्दगी एक एहसास है
जिंदगी एक अहसास है ' अभिलाषाओ का पापा कही कम कही ज्यादा प्यासों का वो मगर क्या सोचता है समझ नहीं आता परिंदों और हवाओ को कैद करने...
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एक समय की बात है, एक राजा ने एक पालतू बन्दर को अपने सेवक के रूप में रखा हुआ था। जहाँ – जहाँ राजा जाता, वह बन्दर भी उसके साथ जाता। राजा के द...
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वाक्य की परिभाषा शब्दों के एक सार्थक समूह को ही वाक्य कहते हैं। सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला। यानी शब्दों का ऐसा समूह जिससे को...
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https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSfOr9FFgXJEawLfQdaQHIeJMMZJP8U2EpnwHFfcsjD4-CyKlw/viewform?usp=sf_link नोट आपने जितने पाठ पढ़े है उन...