दीपेश कुमार जैन इंडिया (लेखक,कवि,शिक्षक, चिंतक, समालोचक) DKJINDIA

स्वरचित कविताओं/विचारो/लेखों/ज्ञानवर्धक संग्रह/कहानियां **न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।* *कामये दुःखतप्तानां प्रणिनां आर्तिनाशनम् ॥*

Sunday, July 26, 2020

भारत की खोज क्लास 8

1. ‘आखिर यह भारत है क्या? अतीत में यह किस विशेषता का प्रतिनिधित्व करता था? उसने अपनी प्राचीन शक्ति को कैसे खो दिया? क्या उसने इस शक्ति को पूरी तरह खो दिया है? विशाल जनसंख्या का बसेरा होने के अलावा क्या आज उसके पास ऐसा कुछ बचा है जिसे जानदार कहा जा सके?’

ये प्रश्न अध्याय दो के शुरूआती हिस्से से लिए गए है। अब तक अब पूरी पुस्तक पढ़ चुके होंगे। आपके विचार से इन प्रश्नों के क्या उत्तर हो सकते हैं? जो कुछ आपने पढ़ा है उसके आधार पर और अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

Answer :


भारत एक भू-भाग का नाम नहीं है अपितु उस भू-भाग में बसे लोगों, उसकी संस्कृति, उसकी सभ्यता, उसके रीति-रिवाजों, उसके इतिहास का नाम भारत है,30 उसके भौतिक स्वरूप का नाम भारत है। भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने अतीत में अनेकों संस्कृतियों को बनते बिगड़ते देखा। अनेकों संस्कृति आई और यहाँ आकर या तो विलीन हो गई या नष्ट हो गई परन्तु इन सब में अपनी संस्कृति को न सिर्फ़ बचाए रखा अपितु उसे श्रेष्ठ भी सिद्ध किया। इसी संस्कृति का प्रतिनिधित्व भी किया है।

उसने कितने ही आक्रमणकारी देखें कितने ही शासनकाल देखें, गुलामी की बेड़ियाँ देखी। एक वक्त ऐसा भी आया जब उसने अपनी शक्ति को दूसरों के पैरों तले पाया पर उसने फिर उठकर अपने सम्मान को पाया अपनी धरोहर को खोने से बचा लिया।

आज बेशक वह एक बड़ी आबादी वाला देश हो परन्तु उसके पास आज भी उसकी बहुमूल्य विरासत है- उसकी संस्कृति, महापुरुषों के उच्च विचार, विविधता में एकता व धर्मनिरपेक्षता।2. आपके अनुसार भारत यूरोप की तुलना में तकनीकी-विकास की दौड़ में क्यों पिछड़ गया था?

Answer :


इसका मुख्य कारण संकुचित मानसिकता का होना है। इन रूढ़ियों ने भारत की गतिशीलता पर दुष्प्रभाव डाला है। यद्यपि पुराने भारत पर नज़र डालें तो भारत में मानसिकता, सजगता और तकनीकी कौशल का अतुल भंडार था। यहाँ लोगों में रंचनात्मक प्रवृत्ति विद्यमान थी। लोगों ने प्रकृति और ब्रह्मांड के रहस्यों को खोजने का प्रयास किया था जिसके उदाहरण हमारे इतिहास में भरे पड़े हैं परन्तु इन सबको भूलकर हमने अनुसरण प्रवृति अपना ली। इसका दुष्प्रभाव ही था कि हमने अपनी रचनात्मक प्रवृत्ति को खो दिया। जहाँ हमने ब्रह्मांड के रहस्य खोजे थे वहीं हम व्यर्थ के आडम्बरों में भ्रमित होकर अपने ज्ञान को धूमिल कर चुके थे। जहाँ राजाओं ने साहसिक कार्यों की लालसा और छलकती हुई जिंदगी के लिए सुदूर देशों तक भारतीय संस्कृति का प्रसार किया था वही हमारी संकीर्ण मानसिकता ने उस प्रसार पर रोक लगा दी थी (कहा जाता था कि महासागरों की यात्रा करने पर नर्क की प्राप्ति होती है)। इन सब संकुचित विचार धाराओं ने भारत के विकास पथ को रोक दिया। भारत में व्याप्त निरक्षरता व समाज में बढ़ते जाति-पाति ने भारत की गतिशीलता को छिन्न-भिन्न कर दिया। हमारी सोच के दायरों को अब धीरे-धीरे जैसे जंग लगने लगा था। हमारी वैज्ञानिक चेतना इन आडम्बरों, रूढ़ियों व संकीर्ण मानसिकता के नीचे दब कर रह गई। इसके विपरीत यूरोप भारत से जो कभी पिछड़ा हुआ था, अपनी वैज्ञानिक चेतना तथा बुलंद जीवन शक्ति और विकसित मानसिकता के कारण तकनीकी विकास में भारत से आगे निकल गया।3. नेहरू जी ने कहा कि – “मेरे ख्याल से हम सब के मन में अपनी मातृभूमि की अलग-अलग तसवीरें हैं और कोई दो आदमी बिलकुल एक जैसा नहीं सोच सकते” अब आप बताइए कि-


(क) आपके मन में अपनी मातृभूमि की कैसी तसवीर है?

(ख) अपने साथियों से चर्चा करके पता करो कि उनकी मातृभूमि की तसवीर कैसी है और आपकी और उनकी तसवीर (मातृभूमि की छवि) में क्या समानताएँ और भिन्नताएँ हैं।

Answer :


(क) मातृभूमि से तात्पर्य जहाँ एक ओर इसका भौगोलिक स्वरूप आता है वहीं दूसरी ओर इसका सामाजिक रूप भी होता है। मेरी दृष्टि से मेरी मातृभूमि सबसे अलग और सबसे गौरवशाली है। अलग से तात्पर्य ‘मेरा’ है। जब हम इसकी भौगोलिक स्थिति को देखें तो ये जहाँ उत्तर में पर्वत राज हिमालय को लेकर खड़ी है तो दूसरी ओर दक्षिण में अथाह समुद्र के रूप में है, पश्चिम में रेगिस्तान के रूप में विराजमान है तो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और ऋतु परिवर्तन। ये सब इसके ही रूप हैं, जो हर जगह रमणीय और रोमांचकारी है। परन्तु सिर्फ़ भौगलिक स्वरूप से ही तो मेरी मातृभूमि की छवि पूर्ण नहीं होती क्योंकि ये सिर्फ़ इसलिए ‘मेरे’ या ‘हम सब’ के मन में मातृभूमि का दर्ज़ा लिया हुए नहीं है अपितु मेरी मातृभूमि ने अनेकों सभ्यताओं और संस्कृतियों को जन्म दिया। इसी मातृभूमि ने जहाँ राजा राम और श्री कृष्ण रूप में महापुरुषों को जन्म दिया है तो ये उन महापुरूषों की भी जननी रही है जिन्होंने भारत का नाम इतिहास में अमिट अक्षरों में लिख दिया है। इसने एक संस्कृति का पोषण नहीं किया अपितु अनेकों संस्कृतियों को अपनी मातृत्व की छाया में पाल-पोस कर महान संस्कृतिय के रूप में उभारा है। इसने जहाँ गुलामी को सहा, तो वहीं स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इन सभी कारणों ने इसे मातृभूमि का गौरव दिया है। मेरी मातृभूमि एक गौरवशाली मातृभूमि है।

(ख) अपने मित्रों व साथियों के साथ चर्चा के आधार पर उत्तर लिखो। हमारे साथी भी हमारे तरह सोचते हैं


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महाभारत भीष्म प्रतिज्ञा महत्वपूर्ण प्रशन

प्रश्न / उत्तर

प्रश्न-1  राजा शांतनु क्यों प्रसन्न थे?

उत्तर-  राजा शांतनु देवव्रत को पुत्र के रूप में पाकर प्रसन्न थे।

 

प्रश्न-2   राजा शांतनु ने यमुना तट पर क्या देखा?

उत्तर-  राजा शांतनु ने यमुना तट पर अप्सरा-सी सुंदर एक तरुणी को देखा जिसका नाम सत्यवती था।

 

प्रश्न-3 सत्यवती को देखकर राजा शांतनु के मन में क्या विचार आया?

उत्तर -  सत्यवती को देखकर राजा शांतनु के मन में उन्हें अपनी पत्नी बनाने की इच्छा हुई।

 

प्रश्न-4   केवटराज की क्या सर्त थी?

उत्तर -  केवटराज की शर्त थी कि राजा शांतनु के बाद हस्तिनापुर का राज सिंहासन सत्यवती के पुत्र को मिले।


 

प्रश्न-5   राजा शांतनु क्यों चिंतित थे?

उत्तर -  राजा शांतनु इसलिए चिंतित थे क्योंकि वह सत्यवती से विवाह करना चाहते थे पर सत्यवती के पिता केवटराज ने जो शर्त रखी वो अनुचित थी।

 

प्रश्न-6   देवव्रत को पिता शांतनु के चिंतित होने का कारण किस प्रकार पता चला?

उत्तर -  देवव्रत को पिता शांतनु के चिंतित होने का कारण उनके सारथी से पूछताछ करने से पता चला।



प्रश्न-7   देवव्रत का नाम भीष्म क्यों पड़ा?

उत्तर -  देवव्रत का नाम भीष्म इसलिए पड़ा क्योंकि उन्होंने आजन्म ब्रह्मचारी रहने की कठोर प्रतिज्ञा की थी।


 

प्रश्न-8   सत्यवती और शांतनु के कितने पुत्र हुए?

उत्तर -  सत्यवती और शांतनु के दो पुत्र हुए - चित्रांगद और विचित्रवीर्य।

 

प्रश्न-9   राजा शांतनु के बाद कौन हस्तिनापुर के सिहांसन पर बैठा?

उत्तर -  राजा शांतनु के बाद चित्रांगद हस्तिनापुर के सिहांसन पर बैठा।

 

प्रश्न-10   चित्रांगद के युद्ध में मारे जाने के बाद हस्तिनापुर की राजगद्दी किसे दी गयी?

उत्तर -  चित्रांगद के युद्ध में मारे जाने के बाद हस्तिनापुर की राजगद्दी विचित्रवीर्य को दी गयी।

 

प्रश्न-11   विचित्रवीर्य की कितनी रानियाँ थीं? उनके नाम लिखें।

उत्तर -  विचित्रवीर्य की दो रानियाँ थीं - अंबिका और अंबालिका।

 

प्रश्न-12   अंबिका और अंबालिका के पुत्रों के नाम लिखें।

उत्तर -  अंबिका के पुत्र थे धृतराष्ट्र और अंबालिका के पुत्र थे पांडु ।



प्रश्न-13    किसने किससे कहा?

i.        “मेरे पिता मल्लाहों के सरदार हैं। पहले उनकी अनुमति ले लीजिए। फिर मैं आपकी पत्नी बनने के लिए तैयार हूँ।”

सत्यवती ने राजा शांतनु से कहा ।

 

ii.       ““आपको मुझे एक वचन देना पड़ेगा ।”

केवटराज ने राजा शांतनु से कहा ।

 

iii.      “जो माँगोगे दूँगा यदि वह मेरे लिए अनुचित न हो ।”

राजा शांतनु ने केवटराज से कहा ।

 

iv.      “पिता जी, संसार का कोई भी सुख ऐसा नहीं है, जो आपको प्राप्त न हो, फिर भी इधर कुछ दिनों से आप दुखी दिखाई दे रहें हैं । आपको किस बात की चिंता है ।”

        देवव्रत ने राजा शांतनु से कहा ।

 

v.       “यदि तुम्हारी आपत्ति का कारण यही है, तो मैं वचन देता हूँ कि मैं राज्य का लोभ नहीं करूँगा । सत्यवती का पुत्र ही मेरे पिता के बाद राजा बनेगा ।”

देवव्रत ने राजा केवटराज से कहा ।

 

vi.      “आर्यपुत्र, इस बात का मुझे पूरा भरोसा है कि आप आपने वचन पर अटल रहेंगे, किंतु आपकी संतान से मैं वैसी आशा कैसे रख सकता हूँ?”

केवटराज ने देवव्रत से कहा ।

 

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Thursday, July 23, 2020

देवव्रत महाभारत कथा

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  • देवव्रत
  • प्रश्न / उत्तर
  • प्रश्न-1  किसने राजा शांतनु को अपने सौंदर्य और नवयौवन से मोह लिया?
    उत्तर-  गंगा ने राजा शांतनु को अपने सौंदर्य और नवयौवन से मोह लिया ।

    प्रश्न-2   पैदा होते ही गंगा अपने पुत्रों से साथ क्या किया करती थी?
    उत्तर-  पैदा होते ही गंगा अपने पुत्रों को नदी की बहती हुई धारा में फेंक दिया करती थी ।

     
    प्रश्न-3 गंगा को पुत्रों को नदी में फेंकता देख कर भी राजा शांतनु कुछ क्यों नहीं कर पाते थे?
    उत्तर -  राजा शांतनु ने गंगा को वचन दिया था जिसके कारण वह सब कुछ देखकर भी मन मसोस कर रह जाते थे ।

    प्रश्न-4   गंगा राजा शांतनु को छोड़ कर वापस क्यों चली गई?
    उत्तर -  राजा शांतनु ने गंगा को अपने आंठवे बच्चे को फेंकने से रोक कर अपना वचन तोड़ दिया था इसलिए गंगा उन्हें छोड़ कर वापस चली गयी ।

    प्रश्न-5   भीष्म पितामह कौन थे?
    उत्तर -  गंगा और राजा शांतनु के आंठवे पुत्र देवव्रत थे जो आगे चलकर भीष्म पितामह के नाम से विख्यात हुए ।
     
    प्रश्न-6   सूत जी के द्वारा बुलाई गयी सभा के अध्यक्ष कौन थे?
    उत्तर -  सूत जी के द्वारा बुलाई गयी सभा के अध्यक्ष महर्षि शौनक थे ।


    प्रश्न-7   एक दिन राजा शांतनु शिकार खेलते-खेलते गंगा के तट पर चले गए तब उन्होंने वहाँ क्या देखा?
    उत्तर -  उन्होंने वहाँ देखा कि एक सुंदर और गठीला युवक गंगा की बहती हुई धारा पर बाण चला रहा था और उसके बाणों के बौछार से गंगा की प्रचंड धारा एकदम रुकी हुई थी ।

    प्रश्न-8   देवव्रत के गुणों का उल्लेख कीजिए।
    उत्तर -  देवव्रत ने शिक्षा महर्षि वसिष्ठ से ली थी । शास्त्र ज्ञान में शुक्राचार्य और रण कौशल में परशुराम ही उनका मुकाबला कर सकते थे । यह जितने कुशल योद्धा थे उतने ही चतुर राजनीतिज्ञ थे।


    देवव्रत

    किसने किस्से कहा
    गंगा ने राजा शांतनु से कहा ।

    ii.       “माँ होकर अपने नादान बच्चों को अकारण ही क्यों मार दिया करती हो? यह घृणित व्यवहार तुम्हें शोभा नहीं देता है ।”
    राजा शांतनु ने गंगा से कहा ।

    iii.      “राजन क्या आप अपना वचन भूल गए हैं? मालूम होता है कि आपको पुत्र से ही मतलब है, मुझ से नहीं ।”
    गंगा ने राजा शांतनु से कहा ।

    iv.      “राजन, पहचाना मुझे और इस युवक को? यही आपका और मेरा आठवाँ पुत्र देवव्रत है ।”
    गंगा ने राजा शांतनु से कहा ।

  • i.        “राजन! आपकी पत्नी होना मुझे स्वीकार है, पर इससे पहले आपको मेरी शर्तें माननी होंगी । क्या आप मानेगें?”
  • देवव्रत
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  • प्रश्न-9    किसने किससे कहा

      • प्रश्न-9    किसने किससे कहा?
        i.        “राजन! आपकी पत्नी होना मुझे स्वीकार है, पर इससे पहले आपको मेरी शर्तें माननी होंगी । क्या आप मानेगें?”
        गंगा ने राजा शांतनु से कहा ।

        ii.       “माँ होकर अपने नादान बच्चों को अकारण ही क्यों मार दिया करती हो? यह घृणित व्यवहार तुम्हें शोभा नहीं देता है ।”
        राजा शांतनु ने गंगा से कहा ।

        iii.      “राजन क्या आप अपना वचन भूल गए हैं? मालूम होता है कि आपको पुत्र से ही मतलब है, मुझ से नहीं ।”
        गंगा ने राजा शांतनु से कहा ।

        iv.      “राजन, पहचाना मुझे और इस युवक को? यही आपका और मेरा आठवाँ पुत्र देवव्रत है ।”
        गंगा ने राजा शांतनु से कहा ।


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