मुझे बुरा लगता है जब सताता है कोई
उस मासूम को बोल न सकने वाले को
जब सताता है कोई मानसिक कमज़ोर को हाँ
। जब सताता है कोई उस बुज़ुर्ग को जो लाचार है
मुझे बुरा लगता है......
जब उड़ाता है कोई हंसी ईमानदारी का
जब हटाता है कोई सालो पुराने पेडो को
जब जगाता है कोई अनंत निद्रा से नन्ही परी को
मुझे बुरा लगता
जब छलता है कोई नेता जनता की भावनाओं को
जब बचाता है कोई देश के गद्दारो को
जब दबाता है सच की आवाज़ को मुझे बुरा लगता है
जब दिखाता कोई ठेंगा निर्मल योजनाओ को जब फैलाता है कोई गंदगियो को विकृत की तरह जब हँसता है कोई ऊपर लिखी बातों पर
मुझे बुरा लगता है............ दीपेश कुमार
जैन
शीसगर वार्ड
छपारा
स्वरचित कविताओं/विचारो/लेखों/ज्ञानवर्धक संग्रह/कहानियां **न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।* *कामये दुःखतप्तानां प्रणिनां आर्तिनाशनम् ॥*
Friday, September 14, 2018
मेरी कविता3 मुझे बुरा लगता है
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