मजहब का कैसा नाच है चलता
कोई नही सिर्फ मासूमो को छलता
सफाईया देते है लोग ऐसे रंगीन पटल पे
गलती किसकी है पता ही नही चलता
दीपेश जैन
स्वरचित कविताओं/विचारो/लेखों/ज्ञानवर्धक संग्रह/कहानियां **न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।* *कामये दुःखतप्तानां प्रणिनां आर्तिनाशनम् ॥*
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
चित्र
कविता 34 ज़िन्दगी एक एहसास है
जिंदगी एक अहसास है ' अभिलाषाओ का पापा कही कम कही ज्यादा प्यासों का वो मगर क्या सोचता है समझ नहीं आता परिंदों और हवाओ को कैद करने...
-
एक समय की बात है, एक राजा ने एक पालतू बन्दर को अपने सेवक के रूप में रखा हुआ था। जहाँ – जहाँ राजा जाता, वह बन्दर भी उसके साथ जाता। राजा के द...
-
वाक्य की परिभाषा शब्दों के एक सार्थक समूह को ही वाक्य कहते हैं। सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला। यानी शब्दों का ऐसा समूह जिससे को...
-
विशेषण परिभाषा , प्रकार,उदाहरण,अभ्यास परिभाषा : संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। जिन संज्ञा...
No comments:
Post a Comment