ए आसमाँ और टहल ले जरा
हवा के झोंके और चल लो ज़रा
परवरदिगार नजर आया है अभी धरती को
वारिश का ये खेलाआंसू किसी और के है ज़रा
दीपेश कुमार जैन
स्वरचित कविताओं/विचारो/लेखों/ज्ञानवर्धक संग्रह/कहानियां **न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।* *कामये दुःखतप्तानां प्रणिनां आर्तिनाशनम् ॥*
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कविता 34 ज़िन्दगी एक एहसास है
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