Thursday, July 16, 2020

वाक्य भेद दीपेश कुमार जैन tgt हिंदी jnv waraseoni mp

वाक्य की परिभाषा

  • शब्दों के एक सार्थक समूह को ही वाक्य कहते हैं।
  • सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला। यानी शब्दों का ऐसा समूह जिससे कोई अर्थ निकल रहा हो, वह वाक्य कहलाता है। जैसे:

वाक्यों का वर्गीकरण

  1. रचना के आधार पर
  2. अर्थ के आधार पर

रचना के आधार पर वाक्य के भेद

रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते हैं:
  1. सरल वाक्य
  2. सयुंक्त वाक्य
  3. मिश्रित/ मिश्र वाक्य

CBSE Class 10 Hindi A व्याकरण वाक्य-भेद - 1

1.


 सरल वाक्य

ऐसा वाक्य जिसमे एक ही क्रिया एवं एक ही कर्ता होता है या जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य एवं एक ही विधेय होता है, वे वाक्य सरल वाक्य कहलाते हैं।

उदाहरण:

  • रोहन खेलता है।
  • मीता दौड़ती है।
  • आकाश भागता रहता है।
  • श्याम पढ़ाई करता है।
  • सीता खाना खाती है।
  • संगीता चलती है।
(सरल वाक्य के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें – सरल वाक्य – उदाहरण, परिभाषा)

2. सयुंक्त वाक्य

ऐसा वाक्य जिसमे दो या दो से अधिक उपवाक्य हो एवं सभी उपवाक्य प्रधान हों, ऐसे वाक्य को सयुंक्त वाक्य कहते हैं।

उदाहरण :

  • वह सुबह गया और शाम को लौट आया।
  • दिन ढल गया और अन्धेरा बढ़ने लगा।
  • प्रिय बोलो पर असत्य नहीं।
  • मैंने बहुत परिश्रम किया इसलिए सफल हो गया।
  • मैं बहुत तेज़ दौड़ा फिर भी ट्रेन नहीं पकड़ सका।
(संयुक्त वाक्य के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें – संयुक्त वाक्य – उदाहरण, परिभाषा)

3. मिश्र वाक्य

  • ऐसे वाक्य जिनमें सरल वाक्य के साथ-साथ कोई दूसरा उपवाक्य भी हो, वे वाक्य मिश्र वाक्य कहलाते हैं।
  •  मिश्र वाक्योँ की रचना एक से अधिक ऐसे साधारण वाक्योँ से होती है, जिनमेँ एक प्रधान वाक्य होता है एवं दूसरा वाक्य आश्रित होता है।

उदाहरण :

  • जो औरत वहां बैठी हैं वो मेरी माँ है।
  • जो लड़का कमरे में बैठा है वह मेरा भाई है।
  • यदि परिश्रम करोगे तो उत्तीर्ण हो जाओगे।
  • मैं जानता हूँ कि तुम्हारे अक्षर अच्छे नहीं बनते
  • ।मिश्रवाक्य के कुछ उदाहरण
    • माँ ने कहा कि शाम को जल्दी लौट आना।
    • जब मैं घर पहुँचा तब वर्षा शुरू हो चुकी थी।
    • जैसे ही बादल घिरे वैसे ही बिजली चमकने लगी।
    • जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ा है, तब-तब ईश्वर धरती पर अवतरित हुए हैं।
    • जहाँ-जहाँ सिंचाई की व्यवस्था है, वहाँ-वहाँ फसलें खूब पैदा होती हैं।
    • आश्रित उपवाक्य आश्रित या गौण उपवाक्यों के तीन भेद होते हैं –
      1. संज्ञा उपवाक्य
      2. विशेषण उपवाक्य
      3. क्रियाविशेषण उपवाक्य
      1. संज्ञा उपवाक्य
      किसी उपवाक्य में जो आश्रिम उपवाक्य मुख्य उपवाक्य की संज्ञा के स्थान पर आते हैं, उन्हें संज्ञा उपवाक्य कहते हैं; जैसे –
      केवट ने कहा कि बिना पाँव धोए आपको अध्यापक ने कहा कि अपने आसपास सफ़ाई रखो।
      इन वाक्यों में प्रयुक्त उपवाक्य ‘बिना पाँव धोए आपको नाव पर नहीं चढ़ाऊँगा’, ‘सुमन अवश्य आएगी’, ‘अपने आस-पास सफ़ाई रखो’ संज्ञा उपवाक्य हैं।
      अन्य उदाहरण
      • अब छात्र समझ गए हैं कि आठवीं तक उन्हें कोई फेल नहीं कर सकता है।
      • माली ने बच्चों को समझाया कि फूल तोड़ना मना है।
      • फल वाले ने कहा कि मैं ताजे फल ही बेचता हूँ।
      संज्ञा उपवाक्यों की पहचान इनके आरंभ में लगे ‘कि’ को देखकर पहचान की जा सकती है। ये उपवाक्य ‘कि’ के द्वारा मुख्य (प्रधान) उपवाक्य से जुड़े होते हैं।
    • नाव पर नहीं चढ़ाऊँगा।
      मैं जानता था कि सुमन अवश्य आएगी।कि’ का प्रयोग उस दशा में नहीं होता-जब संज्ञा उपवाक्य प्रधान उपवाक्य से पहले आ जाए या कभी-कभी ‘कि’ का लोप कर दिया जाए; जैसे –
      तुम मेरी मदद करोगे, मुझे पता था।
      वह त्याग पत्र नहीं देता, उसने घर वालों को बता दिया था।
      मोहन को पता था, गौरव आने वालों में नहीं है।
      मरीज को लगने लगा, अब वह ठीक हो जाएगा।
      इन वाक्यों में रंगीन अंश संज्ञा उपवाक्य हैं जिनके पहले ‘कि’ का लोप है।
      2. विशेषण उपवाक्य
      विशेषण उपवाक्य मुख्य उपवाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण उपवाक्य कहते हैं; जैसे –
      ईश्वर उनकी मदद करता है जो अपनी मदद स्वयं करते हैं।विपत्ति का सामना वही कर पाते हैं जो धैर्य बनाए रखते हैं।
      जो दवाएँ तुमने मुझे कल दी थीं वे नकली हैं।
      जिस मरीज का आपरेशन हुआ था, वह अब चलने लगा है।
      विशेषण उपवाक्यों की पहचान – विशेषण उपवाक्य जोजिसेजिसने, जिन्होंनेजिसजिसको आदि ‘जो’ के विभिन्न रूपों से शुरू होते हैं।
      अन्य उदाहरण
      • जो फल तुम लाए थे, वे बहुत ही मीठे हैं।
      • जिस छात्र ने सबसे अधिक परिश्रम किया था, वही प्रथम आया है।
      • जिन्होंने दुखियों की मदद की है उनका नाम अमर हो गया।
      उपर्युक्त वाक्यों के रंगीन अंश विशेषण उपवाक्य हैं।3. क्रियाविशेषण उपवाक्य
      प्रधान उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बताने वाले आश्रित उपवाक्यों को क्रियाविशेषण उपवाक्य कहते हैं; जैसे –
      जब मैं जागता हूँ, तब टहलने जाता हूँ।
      जैसे ही अलार्म बजा वैसे ही वह उठ बैठा।
      जहाँ साफ़-सफ़ाई होती है वहाँ ईश्वर का वास होता है।
      क्रियाविशेषण उपवाक्य के भेद – क्रियाविशेषण उपवाक्य मुख्य उपवाक्य की क्रिया का काल, रीति, स्थान,परिमाण, कार्य का कारण आदि का बोध कराते हैं। इस आधार पर क्रियाविशेषण उपवाक्य के पाँच भेद होते हैं –
      (i) कालवाचक उपवाक्य –
      जब सूरज उगता है तब अँधेरा दूर हो जाता है।
      जैसे ही मैं विद्यालय पहुँचा वैसे ही वर्षा होने लगी।) रीतिवाचक उपवाक्य –
      जैसा सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी करते थे, वैसा दूसरा नहीं।
      जिस तरह गुरु ने समझाया था, शिष्य उसी तरह का आचण किया।
      जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाओगे, मंज़िल निकट आती जाएगी।
      (iii) स्थानवाचक उपवाक्य –
      जहाँ आग होती है वहाँ धुआँ होता है।
      जहाँ संत निवास करते हैं वह स्थान स्वर्ग तुल्य होता है।
      जहाँ-जहाँ सरदार पटेल गए उनका भव्य स्वागत हुआ।
      (iv) परिमाणवाचक उपवाक्य –
      जितनी ही वर्षा होगी उतनी ही अच्छी फ़सल होगी।
      जितना पचा सको उतना ही खाओ।
      जितनी बरफ़ पड़ेगी सरदी उतनी ही बढ़ती जाएगी।
      (v) परिणामवाचक उपवाक्य –
      यदि तुमने मन लगाकर पढ़ाई की होती तो यह दिन न देखना पड़ता।
      वह आज इसलिए विद्यालय जाएगा क्योंकि आज पैसे बँटेंगे।
      यदि कबूतर लालच न करते तो जाल में न फंसते।
      उपर्युक्त वाक्यों में रंगीन अंश क्रियाविशेषण आश्रित उपवाक्य हैं।
      क्रियाविशेषण उपवाक्य की पहचान-जब, जैसा, जहाँ, ज्यों-ज्यों आदि शुरू में देखकर की जा सकती है।
      वाक्य रचनांतरण या रूपांतरणसरल वाक्य से संयुक्त वाक्य में बदलना-सरल वाक्यों को संयुक्त वाक्य बनाते समय उन्हें इस तरह से दो भागों में बाँटते हैं कि दो क्रियाएँ बन सकें। अब इन वाक्यों को और, या, वा, अथवा, किंतु, परंतु, लेकिन, इसलिए, आदि से जोड़ने का प्रयास करते हैं; जैसे –
      CBSE Class 10 Hindi A व्याकरण वाक्य-भेद - 4
सरल वाक्य से मिश्रवाक्य में रूपांतरण-सरल वाक्यों को मिश्रवाक्य बनाते समय उनके शुरू जब, जैसे ज्योंही, जो, जबसे आदि जोड़ते हैं, जैसे –
CBSE Class 10 Hindi A व्याकरण वाक्य-भेद - 6संयुक्त वाक्य से मिश्र वाक्य बनाना-संयुक्त वाक्य से मिश्र वाक्य बनाते समय समुच्चयबोधकों को अलग कर देते हैं तथा आवश्यक बदलाव कर मिश्र वाक्य में बदल देते हैं; जैसे –
CBSE Class 10 Hindi A व्याकरण वाक्य-भेद - 7प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों को रचना के भेद के आधार पर पहचानकर लिखिए –
  1. वह बाज़ार गई और स्वेटर लाई।
  2. घंटी बजते ही छात्र कक्षाओं में चले गए।
  3. यद्यपि वह ईमानदार है फिर भी काम से जी चुराता है।
  4. बुढ़िया रो रही थी इसलिए मैंने उससे रोने का कारण पूछा।
  5. जब हेलीकॉप्टर से खाना गिराया गया तब लोगों को भोजन मिला।
  6. बिजली आई परंतु टीवी न चली।
  7. दोनों देश के सैनिक घमासान युद्ध कर रहे थे।
  8. वर्षा रुकी और खेल शुरू हो गया।
उत्तर:
  1. संयुक्त वाक्य
  2. सरल वाक्य
  3. मिश्र वाक्य
  4. संयुक्त वाक्य
  5. मिश्र वाक्यनीचे दिए गए वाक्यों को निर्देशानुसार बदलिए –
    1. सवेरा होते ही चिड़ियाँ चहचहाने लगी। (संयुक्त वाक्य )
    2. पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया और उसे मुँह की खानी पड़ी। (सरल वाक्य)
    3. जब थाने में शिकायत की गई तब लाउडस्पीकर का शोर बंद हुआ। (मिश्र वाक्य)
    4. परिश्रमी लोगों के लिए कोई काम असंभव नहीं होता। (संयुक्त वाक्य)
    5. आकाश में बादल छाते ही शीतल हवा बहने लगी। (मिश्र वाक्य)
    6. अध्यापक कक्षा में आए और पढ़ाने लगे। (मिश्र वाक्य)
    7. अभिनेता अमिताभ बच्चन को सदी का महानायक कहा जाता है। (मिश्र वाक्य)
    8. परिश्रम करो और सफ़लता प्राप्त करो। (सरल वाक्य)
  6. संयुक्त वाक्य
  7. सरल वाक्य
  8. संयुक्त वाक्य।निम्नलिखित वाक्यों के रेखांकित अंशों को देखकर आश्रित उपवाक्य भेद पहचानिए –
    1. अध्यापक ने उस छात्र पर जुर्माना लगाया जिसने प्रयोगशाला में उपकरण तोड़े थे
    2. राम ने सुमंत से कहा कि अब अयोध्या वापस लौट जाओ।
    3. जब बारिश हो रही थी तब बच्चे नहा रहे थे।
    4. कृष्ण ने दुर्योधन से कहा कि पांडवों को आधा राज्य दे दे।
    5. जो गरीबों की मदद करते हैं वे दीनबंधु कहलाते हैं।
    6. यदि मन लगाकर पढ़ते तो फेल न होते।
    7. अध्यापक ने छात्रों से कहा कि बिना पटाखों के दीपावली मनाएँ।
    8. जब-जब बाढ़ आई तब-तब फ़सलें नष्ट हुई हैं।
    उत्तर:
    1. विशेषण उपवाक्य
    2. संज्ञा उपवाक्य
    3. क्रियाविशेषण उपवाक्य
    4. संज्ञा उपवाक्य
    5. विशेषण उपवाक्य
    6. क्रियाविशेषण उपवाक्य
    7. संज्ञा उपवाक्य
    8. क्रियाविशेषण उपवाक्य
    प्रश्न 4.
    निम्नलिखित वाक्यों को रचना के भेद के आधार पर पहचानकर लिखिए –
    1. मनोज घर आते ही मैच देखने लगा।
    2. जो छात्र विज्ञान में रुचि लेते हैं वही डॉक्टर इंजीनियर बनते हैं।
    3. आप चाय लेंगे अथवा कॉफ़ी।
    4. बच्चे को सड़क पार करनी थी, पर वह साइकिल से टकरा गया।
    5. गौरैयों को पकड़ने वाली बिल्ली को कुत्ते ने काट खाया।
    6. वह आलसी है और कामचोर भी।
    7. जब विवाह सकुशल पार हो गया तब लड़की के पिता ने चैन की साँस ली।
    उत्तर:
    1. सरल वाक्य
    2. मिश्र वाक्य
    3. संयुक्त वाक्य
    4. संयुक्त वाक्य
    5. सरल वाक्य
    6. संयुक्त वाक्य
    7. मिश्र वाक्य। प्रश्न
    प्रश्न 5.
    नीचे दिए गए वाक्यों को निर्देशानुसार बदलिए
    1. वे कार्यकर्ता कहाँ हैं जिन्होंने चुनाव जित
    2. किसान खेत में गया और फसल काटने लगा। (मिश्र वाक्य)
    3. धमाके में पुल के टुकड़े-टुकड़े हो गए। (मिश्र वाक्य)
    4. मैं मोबाइल फ़ोन खरीदने बाज़ार गया। (संयुक्त वाक्य)
    5. दीवालें गंदी करने वाले छात्रों को दंडित किया जाएगा। (मिश्र वाक्य)
    6. सेठ बहुत मोटा है इसलिए तेज़ चल नहीं सकता।(सरल वाक्य)
    7. एक बजते ही सर्कस का शो शुरू हो गया।(संयुक्त वाक्य)
    8. उत्तर:
      1. चुनाव जिताने वाले कार्यकर्ता कहाँ हैं?
      2. जब किसान खेत में गया तब वह फ़सल काटने लगा।
      3. जैसे ही धमाका हुआ पुल के टुकड़े-टुकड़े हो गए।
      4. मैं बाज़ार गया और मोबाइल फ़ोन खरीदा। ।
      5.  छात्र दीवालें गंदी करेंगे उन्हें दंडित किया जाएगा।
      6. मोटा सेठ तेज़ नहीं चल सकता है।
      7. एक बजा और सर्कस शुरू हो गया।
      8. प्रश्न 6.
        निम्नलिखित वाक्यों के रेखांकित अंशों को देखकर आश्रित उपवाक्य भेद पहचानिए
        1. वे छात्र, जो कल नहीं आए थे खड़े हो जाएँ।
        2. जिन्होंने भारत को आजाद करवाया उनका नाम इतिहास में अमर रहेगा।
        3. जैसा मोर नाचता है वैसा कोई दूसरा पक्षी नहीं।
        4. मुझे विश्वास है कि महँगाई अवश्य कम होगी।
        5. यह आपके निर्देशन का फल है जिसके कारण फ़िल्म इतनी सफल हुई।
        6. जहाँ-जहाँ गांधी जी गए उनका भव्य स्वागत हुआ।
        7. विशेषण उपवाक्य
        8. विशेषण उपवाक्य
        9. क्रियाविशेषण उपवाक्य
        10. संज्ञा उपवाक्य
        11. विशेषण उपवाक्य
        12. क्रियाविशेषण उपवाक्यबोर्ड परीक्षाओं के प्रश्न
          प्रश्न 1.
          कोष्टक में दिए गए निर्देशों के अनुसार उत्तर दीजिए। (Comptt. 2013)
          (क) सुबह उठकर उसने दूध पिया। (रचना के आधार पर वाक्य-भेद लिखिए)
          (ख) झूठ बोलने वालों पर कोई विश्वास नहीं करता। (मिश्र वाक्य में बदलिए)
          (ग) मेरे समझाने पर वह मान गई। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
          (घ) उस लड़की को बुलाओ जो अखबार पढ़ रही है। (सरल वाक्य में बदलिए)
          (ङ) जो महिला अधिवेशन को संबोधित करने के लिए उठी वह बहुत सुंदर थी। (सरल वाक्य में बदलिए)
          उत्तर:
          (क) सरल वाक्य
          (ख) जो झूठ बोलते हैं, उन पर कोई विश्वास नहीं करता।ग) मैंने समझाया और वह मान गई।
          (घ) अखबार पढ़ रही लड़की को बुलाओ।
          (ङ) अधिवेशन को संबोधित करने के लिए उठी महिला बहुत सुंदर थी।
          प्रश्न 2.
          निर्देशानुसार उत्तर दीजिए। (Delhi 2013)
          (क) मैंने सुना है कि तुम अपनी कक्षा में प्रथम आए हो- वाक्य का प्रकार बताइए।
          (ख) वह स्टेशन पहुंचा और हम वहाँ से चल दिए– यह किस प्रकार का वाक्य है।
          (ग) उन्होंने जैसे ही शहनाई बजानी शुरू की, सब उसकी ध्वनि में मग्न हो गए- संयुक्त वाक्य में बदलिए।
          (घ) मेरे पास एक किताब है जो बहुत रुचिकर है- सरल वाक्य में बदलिए।
          (ङ) वह बहुत विनम्र है और सर्वत्र सम्मान प्राप्त करती है- मिश्र वाक्य में रूपांतरित कीजिए।
          उत्तर:
          (क) मिश्र वाक्यग) उन्होंने शहनाई बजानी शुरू की और सब उसकी ध्वनि में मग्न हो गए।
          (घ) मेरे पास एक बहुत रुचिकर किताब है।
          (ङ) वह सर्वत्र सम्मान प्राप्त करती है क्योंकि वह बहुत विनम्र है।
          प्रश्न 3.
          निर्देशानुसार उत्तर दीजिए। (Foreign 2014)
          (क) उन्होंने मूर्ति को देखा और रुक गए। (मिश्र वाक्य में बदलिए)
          (ख) जो छात्र प्रश्न पूछता है उसका ज्ञान बढ़ता है। (सरल वाक्य में रूपांतरण कीजिए)
          (ग) न ही वह मेरे घर आता है और न ही मैं उसके घर जाता हूँ। (वाक्य-भेद बताइए)
          (घ) उसने आश्वासन दिया कि वह भविष्य में यह गलती नहीं दोहराएगा। (किस प्रकार का वाक्य है?)
          उत्तर:
          (क) जब उन्होंने मूर्ति की ओर देखा तब रुक गए।
          (ख) प्रश्न पूछने वाले छात्र का ज्ञान बढ़ता है।र्देशानुसार उत्तर दीजिए। (Delhi 2014)
          (क) उपदेशक मंच पर बैठकर उपदेश देने लगा। (संयुक्त वाक्य में रूपांतरण कीजिए)
          (ख) सूर्य उदित हुआ और चारों ओर प्रकाश फैल गया। (मिश्र वाक्य में बदलिए)
          (ग) जैसे ही वह धन-संपन्न हुआ वैसे ही उसकी समस्याएँ बढ़ने लगीं। (वाक्य-भेद बताइए)
          (घ) भविष्यवाणी है कि आज वर्षा होगी। (वाक्य-भेद लिखिए)
          उत्तर:
          (क) उपदेशक मंच पर बैठा और उपदेश देने लगा।
          (ख) जब सूर्य उदित हुआ तब चारों ओर प्रकाश फैल गया।
          (ग) मिश्रवाक्य
          (घ) मिश्रवाक्य
          (ख) संयुक्त वाक् 5.
        13. निर्देशानुसार उत्तर दीजिए। (All India 2014)
          (क) विदुषी कक्षा में बैठकर अपनी सहेली रेखा की प्रतीक्षा करने लगी। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
          (ख) जैसे ही उसने औषधि ली, उसका रक्तचाप सामान्य हो गया। (वाक्य-भेद बताइए)
          (ग) प्रतिस्पर्धा में प्रथम आने वाले छात्र को बुलाओ। (मिश्र वाक्य बनाइए)
          (घ) वह गाड़ी चलाने के साथ-साथ मोबाइल पर बात भी करता है। (संयुक्त वाक्य बनाइए)
          उत्तर:
        14. (क) विदुषी कक्षा में बैठ गई अपनी सहेली रेखा की प्रतीक्षा करने लगी।
          (ख) मिश्रवाक्य
          (ग) जो छात्र प्रतिस्पर्धा में प्रथम आया है, उसे बुलाओ।
          (घ) वह गाड़ी चलाता है साथ-साथ मोबाइल पर बात भीWWW.DKJINDIA.BLOGSPOT.COM

उपसर्ग हिंदी व्याकरण दीपेश कुमार जैन जवाहर नवोदय विद्यालय वारासिवनी

उपसर्ग किसे कहते हैं, उदाहरण सहित समझाइए?

  • वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के पूर्व में लगकर नए शब्द का निर्माण करते हैं अर्थात् नए अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं। ये शब्दांश होने के कारण वैसे इनका स्वतंत्ररूप से अपना कोई महत्त्व नहीं होता किन्तु शब्द के पूर्व संश्लिष्ट अवस्था में लगकर उस शब्द विशेष के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं।
  • जैसे— ‘हार’ एक शब्द है, इसके साथ शब्दांश प्रयुक्त होने पर कई नये शब्द बनते हैं यथा— आहार (भोजन), उपहार (भेंट) प्रहार (चोट) विहार (भ्रमण), परिहार (त्यागना), प्रतिहार (द्वारपाल) संहार (मारना) आदि। अतः ‘हार’ शब्द के साथ प्रयुक्त क्रमशः आ, उप, प्र, वि, परि, प्रति, सम्, उत् शब्दांश उपसर्ग की श्रेणी में आते हैं।
उपसर्ग के प्रकार:
हिन्दी में उपसर्ग तीन प्रकार के होते हैं-
  • संस्कृत के उपसर्ग
  • हिन्दी के उपसर्ग
  • विदेशी उपसर्ग
संस्कृत के उपसर्ग
  • संस्कृत में उपसर्ग की संख्या 22 होती है। ये उपसर्ग हिन्दी में भी प्रयुक्त होते हैं, इसलिए इन्हें संस्कृत के उपसर्ग कहते हैं।
उपसर्गअर्थउपसर्ग से बने शब्द
अतिअधिक/परेअतिशय, अतिक्रमण, अतिवृष्टि, अतिशीघ्र अत्यन्त, अत्यधिक, अत्याचार, अतीन्द्रिय अत्युक्ति, अत्युत्तम, अत्यावश्यक, अतीव
अधिप्रधान/श्रेष्ठअधिकरण, अधिनियम, अधिनायक अधिकार, अधिमास, अधिपति, अधिकृत अध्यक्ष, अधीक्षण, अध्यादेश, अधीन अध्ययन, अधीक्षक, अध्यात्म, अध्यापक
अनुपीछे/समानअनुकरण, अनुकूल, अनुचर, अनुज, अनुशासन, अनुरूप, अनुराग, अनुक्रम, अनुनाद, अनुभव, अनुशंसा, अन्वय, अन्वीक्षण, अन्वेषण, अनुच्छेद, अनूदित
अपबुरा/विपरीतअपकार, अपमान, अपयश, अपशब्द अपकीर्ति, अपराध, अपव्यय, अपहरण, अपकर्ष, अपशकुन, अपेक्षा
अभिपास/सामनेअभिनव, अभिनय, अभिवादन, अभिमान, अभिभाषण, अभियोग, अभिभूत, अभिभावक अभ्युदय, अभिषेक, अभ्यर्थी, अभीष्ट अभ्यन्तर, अभीप्सा, अभ्यास
अवबुरा/हीनअवगुण, अवनति, अवधारण, अवज्ञा, अवगति, अवतार, अवसर, अवकाश, अवलोकन, अवशेष, अवतरण
तक/सेआजन्म, आहार, आयात, आतप, आजीवन, आगार, आगम, आमोद आशंका, आरक्षण, आमरण, आगमन आकर्षण, आबालवृद्ध, आघात
उत्ऊपर/श्रेष्ठउत्पन्न, उत्पत्ति, उत्पीड़न, उत्कंठा उत्कर्ष, उत्तम, उत्कृष्ट, उदय, उन्नत, उल्लेख, उद्धार, उच्छ्वास उज्ज्वल, उच्चारण, उच्छृंखल, उद्गम
उपपास/सहायकउपकार, उपवन, उपनाम, उपचार, उपहार, उपसर्ग, उपमंत्री, उपयोग, उपभोग, उपभेद, उपयुक्त, उपभोग उपेक्षा, उपाधि, उपाध्यक्ष
दुर्कठिन/बुरा/विपरीतदुराशा, दुराग्रह, दुराचार, दुरवस्था, दुरुपयोग, दुरभिसंधि, दुर्गुण, दुर्दशा दुर्घटना, दुर्भावना, दुरुह
दुस्बुरा/विपरीत/कठिनदुश्चिन्त, दुश्शासन, दुष्कर, दुष्कर्म, दुस्साहस, दुस्साध्य
निबिना/विशेषनिडर, निगम, निवास, निदान, निहत्थ, निबन्ध, निदेशक, निकर, निवारण, न्यून, न्याय, न्यास, निषेध, निषिद्ध
निर्बिना/बाहरनिरपराध, निराकार, निराहार, निरक्षर, निरादर, निरहंकार, निरामिष, निर्जर, निर्धन, निर्यात, निर्दोष, निरवलम्ब, नीरोग, नीरस, निरीह, निरीक्षण
निस्बिना/बाहरनिश्चय, निश्छल, निष्काम, निष्कर्म निष्पाप, निष्फल, निस्तेज, निस्सन्देह
प्रआगे/अधिकप्रदान, प्रबल, प्रयोग, प्रचार, प्रसार, प्रहार, प्रयत्न, प्रभंजन, प्रपौत्र, प्रारम्भ, प्रोज्ज्वल, प्रेत, प्राचार्य, प्रायोजक, प्रार्थी
पराविपरीत/पीछे/अधिकपराजय, पराभव, पराक्रम, परामर्श, परावर्तन, पराविद्या, पराकाष्ठा
परिचारों ओर/पासपरिक्रमा, परिवार, परिपूर्ण, परिमार्जन, परिहार, परिक्रमण, परिभ्रमण, परिधान, परिहास, परिश्रम, परिवर्तन, परीक्षा, पर्याप्त, पर्यटन, परिणाम, परिमाण, पर्यावरण, परिच्छेद, पर्यन्त
प्रतिप्रत्येक/विपरीतप्रतिदिन, प्रत्येक, प्रतिकूल, प्रतिहिंसा, प्रतिरूप, प्रतिध्वनि, प्रतिनिधि, प्रतीक्षा, प्रत्युत्तर, प्रत्याशा, प्रतीति
विविशेष/भिन्नविजय, विज्ञान, विदेश, वियोग, विनाश, विपक्ष, विलय, विहार, विख्यात, विधान, व्यवहार, व्यथर्, व्यायाम, व्यंजन, व्याधि, व्यसन, व्यूह
सुअच्छा/सरलसुगन्ध, सुगति, सुबोध, सुयश, सुमन, सुलभ, सुशील, सुअवसर, स्वागत, स्वल्प, सूक्ति
सम्अच्छी तरह/पूर्ण शुद्धसंकल्प, संचय, सन्तोष, संगठन, संचार, सलंग्न, संयोग, संहार, संशय, संरक्षा
अन्नहीं/बुराअनन्त, अनादि, अनेक, अनाहूत, अनुपयोगी, अनागत, अनिष्ट, अनीह अनुपयुक्त, अनुपम, अनुचित, अनन्य
उपर्युक्त उपसर्गों के अतिरिक्त संस्कृत के निम्न उपसर्ग भी हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं –
  1. अन्तर् – अन्तर्गत, अन्तरात्मा, अन्तर्धान, अन्तर्दशा अन्तर्राष्ट्रीय, अन्तरिक्ष, अन्तर्देशीय
  2. पुनर् – पुनर्जन्म, पुनरागमन, पुनरुदय, पुनर्विवाह पुनर्मूल्यांकन, पुनर्जागरण
  3. प्रादुर – प्रादुर्भाव, प्रादुर्भूत
  4. पूर्व – पूर्वज, पूर्वाग्रह, पूर्वार्द्ध, पूर्वाह्न, पूर्वानुमान
  5. प्राक् – प्राक्कथन, प्राक्कलन, प्रागैतिहासिक, प्राग्देवता, प्राङ्मुख, प्राक्कर्म
  6. पुरस् – पुरस्कार, पुरश्चरण, पुरस्कृत
  7. बहिर् – बहिरागत, बहिर्जात, बहिर्भाव, बहिरंग, बहिर्गमन
  8. बहिस् – बहिष्कार, बहिष्कृत
  9. आत्म – आत्मकथा, आत्मघात, आत्मबल, आत्मचरित, आत्मज्ञान
  10. सह – सहपाठी, सहकर्मी, सहोदर, सहयोगी सहानुभूति, सहचर
  11. स्व – स्वतंत्र, स्वदेश, स्वराज्य, स्वाधीन, स्वरचित, स्वनिर्मित, स्वार्थ
  12. पुरा – पुरातन, पुरातत्त्व, पुरापथ, पुराण, पुरावशेष
  13. स्वयं – स्वयंभू, स्वयंवर, स्वयंसेवक, स्वयंपाणि, स्वयंसिद्ध
  14. आविस् – आविष्कार, आविष्कृत
  15. आविर् – आविर्भाव, आविर्भूत
  16. प्रातर् – प्रातः काल, प्रातः वन्दना, प्रातः स्मरणीय
  17. इति – इतिश्री, इतिहास, इत्यादि, इतिवृत्त
  18. अलम् – अलंकरण, अलंकृत, अलंकार
  19. तिरस् – तिरस्कार, तिरस्कृत
  20. तत् – तल्लीन, तन्मय, तद्धित, तदनन्तर, तत्काल, तत्सम, तद्भव, तद्रूप
  21. अमा – अमावस्या, अमात्य
  22. सत् – सत्कर्म, सत्कार, सद्गति, सज्जन, सच्चरित्र, सद्धर्म, सदाचार
हिन्दी के उपसर्ग
  • अन (नहीं)— अनपढ़, अनजान, अनबन, अनमोल अनहोनी, अनदेखी, अनचाहा, अनसुना
  • अध (आधा)— अधमरा, अधपका, अधजला, अधगला, अधकचरा, अधखिला, अधनंगा
  • उ – उचक्का, उजड़ना, उछलना, उखाड़ना, उतावला
  • उन  (एक कम)- उन्नीस, उनतीस, उनचालीस, उनचास उनसठ, उन्नासी
  •  (अब)-  औगुन, औगढ़, औसर, औघट, औतार
  • कु (बुरा)- कुरूप, कुपुत्र, कुकर्म, कुख्यात, कुमार्ग कचुाल, कचुक्र, करुीति
  • चौ (चार)- चौराहा, चौमासा, चौपाया, चौरंगा, चौकन्ना, चौमुखा, चौपाल
  • पच – (पाँच) पचरंगा, पचमले , पचकूटा, पचमढ़ी
  • पर (दूसरा) – परहित, परदेसी, परजीवी, परकोटा, परदादा, परलोक, परकाज, परोपकार
  • भर (पूरा)- भरपेट, भरपूर, भरकम, भरसक, भरमार, भरपाई
  • बिन (बिना) – बिनखाया, बिनब्याहा बिनबोया बिन माँगा, बिन बुलाया, बिनजाया
  • ति (तीन) – तिरंगा, तिराहा, तिपाई, तिकोन, तिमाही
  • दु (दो/बुरा) – दुरंगा, दुलत्ती, दुनाली, दुराहा दुपहरी, दुगुना, दुकाल, दुबला
  • का (बुरा)- कायर, कापुरुष, काजल
  • स (सहित)- सपतू , सफल, सबल, सगुण, सजीव, सावधान, सकर्मक
  • चिर (सदैव) – चिरकाल, चिरायु, चिरयौवन, चिरपरिचित चिरस्थायी, चिरस्मरणीय, चिरप्रतीक्षित
  • न (नहीं) – नकुल, नास्तिक, नग, नपुंसक, नगण्य, नेति,
  • बहु (ज्यादा) – बहुमूल्य, बहुवचन, बहुमत, बहुभुज, बहुविवाह, बहुसंख्यक, बहूपयोगी
  • आप (स्वयं) – आपकाज, आपबीती, आपकही, आपसुनी
    नाना (विविध) – नानाप्रकार, नानारूप, नानाजाति, नानाविकार
    क (बुरा)— कपूत, कलंक, कठोर
    सम (समान) – समतल, समदर्शी, समकोण, समकक्ष, समकालीन, समचतुर्भुज, समग्र
    विदेशी उपसर्ग
    हिन्दी भाषा में अन्य भाषाओं के शब्द भी प्रयुक्त होते हैं फलतः उनके उपसर्गों को हिन्दी में विदेशी उपसर्ग की संज्ञा दी जाती है।
    बे रहित – बेघर, बेवफा, बेदर्द, बेसमझ, बेवजह, बेहया, बेहिसाब
    दर में – दरअसल, दरबार, दरखास्त, दरहकीकत, दरम्यान
    बा सहित – बाइज्जत, बामुलायजा, बाअदब, बाकायदा
    कम अल्प – कमअक्ल, कमउम्र, कमजोर, कम समझ, कमबख्त
    ला परे/बिना – लाइलाज, लावारिस, लापरवाह, लापता, लाजवाब
    ना नहीं-  नापसन्द, नाकाम, नाबालिग, नाजायज, नालायक, नाराज, नादान
    हर प्रत्येक – हरदम, हरवक्त, हररोज, हरहाल हर मुकाम, हर घड़ी
    खुश श्रेष्ठ – खुशनुमा, खुशहाल, खुशबू, खुशखबरी खुशमिजाज
    बद बुरा – बदबू, बदचलन, बदमाश, बदमिजाज, बदनाम, बदकिस्मत
    सर मुख्य/प्रधान – सरपचं , सरदार, सरताज, सरकार
    ब सहित – बखूबी, बतौर, बशर्त, बदौलत
    बिला बिना – बिलाकसूर, बिलावजह, बिलाकानून
    बेश अत्यधिक – बेश कीमती, बेश कीमत
    नेक भला – नेकराह, नेकनाम, नेकदिल, नेकनीयत
    ऐन ठीक _ ऐनवक्त, ऐनजगह, ऐन मौके
    हम साथ _ हमराज, हमदम, हमवतन, हमसफर, हमदर्द
    अल निश्चित – अलगरज, अलविदा, अलबत्ता, अलबेता
    गैर रहित  भिन्न – गैर हाजिर, गैरमदर्, गैर वाजिब
    हैड प्रमुख-  हैडमास्टर, हैड ऑफिस, हैडबॉय
    हाफ आधा – हाफकमीज, हाफटिकट, हाफपेन्ट, हाफशर्ट
    सब उप – सब रजिस्ट्रार, सबकमेटी, सब इन्स्पेक्टर
    को सहित – को-आपरेटिव, को-आपरेशन, को-एजूकेशन

Wednesday, May 1, 2019

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कुछ लम्हे भागादौड़ी से निकाल    कुछ लम्हे भागादौड़ी से निकाल

खुद को  खुद    के लिए सम्हाल

धूप छाव का ये खेला कब रुकने वाला

सुकून के इन पलो को न कर बेहाल
       कुछ लम्हे भागादौड़ी से निकाल गीत ग़ज़ल राग ये सब है कुछ ख्याल
सावन भादो जेठ आसाढ़ है खुशहाल
तोड़े कब टूटे है बंधन किसी से किसी के
खोने पाने का किस्सा हरदम हरहाल
       कुछ लम्हे भागादौड़ी से निकाल                 
कर्म के फेरे है चहुँओर लगे फिलहाल
अभी यही है जीवन करना है  कमाल
सुख शांति का सच्चा संघर्ष और क्या
बस दिन व दिन मत कर कोई मलाल
       कुछ लम्हे भागादौड़ी से निकाल
                      दीपेश कुमार जैन
                          1/5/2019

Friday, April 26, 2019

 कसक जिंदगी की  बाकी  है    अभी   महक     की  मानिंद बाकी   है अभी   वो ढूंढता रहा   जो    मुझे गलियों में   उसकी निगाहों में पानी बाकी है अभी          कसक जिंदगी की बाकी है अभी
तलब निगाहों की कम नही होगी अभी
पर्वतों में झरनों की रुमानियत बाकी है अभी
कोई जाकर कह   दे ये भी    उन्हें
ज़िन्दगी के मजीरों में साज बाकी
अभी                                     कसक जिंदगी की बाकी है अभी  ....
जुबा पे हस्व कपकपाहट बाकी है अभी
खेल  के पड़ाव का एक हिस्सा बाकी है अभी
जिरह की वजह को पा नही सकते कभी
कोई कह दे उनसे अंत का अनंत होना बाकी है अभी                          कसक जिंदगी की बाकी है  अभी  ..
..                       
दीपेश कुमार जैन
26/4/19

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कविता 34 ज़िन्दगी एक एहसास है

जिंदगी एक अहसास है ' अभिलाषाओ का पापा  कही कम कही ज्यादा प्यासों का  वो मगर क्या सोचता है समझ नहीं आता परिंदों और हवाओ को कैद करने...